सड़क पर रेंगती भीड़ संग आवाज़ मिला ली मैंने,
एक प्रबल संघर्ष की बिसात बिछा दी मैंने,
खून था जो बंद अबतक दिल में रहा खौलता,
आँच से उतारकर उससे अधर्म जला दी मैंने...
एक प्रबल संघर्ष की बिसात बिछा दी मैंने,
खून था जो बंद अबतक दिल में रहा खौलता,
आँच से उतारकर उससे अधर्म जला दी मैंने...