Think beyond your imagination......
Thursday, July 14, 2016
कहीं तू भी मचल रही होगी
मैं तो ढूंढ रहा था तुझे कलियों में,
किसी कोने में तू भी मचल रही होगी
सोचता हूँ दीदार हो तेरा आईने में,
कहीं तस्वीर तेरी भी छलक रही होगी
गुज़र जाने दे मुझको भी इस रास्ते से,
घूँघट में तेरी सूरत झलक रही होगी
कहीं तू भी मचल रही होगी
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)