धर्म के नाम पर, न हो अनर्थ, न हो विरक्त,
तोड़े कोई जो धर्म अगर, बहने दे उसका मैल रक्त,
सन्नाटे की आहट पे जब चौंकता मनुष्य हो,
जागने से पहले किसी शांति का वो दस्यु हो,
वो नीति जब ठहर गयी, शोलों में घुल के पली,
तभी तो जाग कर उठी, एक आत्मा.. पर अधजली,
दौड़ कर उस भीड़ में जो चीर कर देखा कफ़न,
आत्मा-रहित शरीर था मुस्कुरा, जीते जी था हुआ दफ़न,
कराह कर पुकार लूँ, एक जोश से जूनून से,
कहूँ कि राह न मिलती, एक आह से, एक खून से,
एक प्यास की गली में लड़खड़ा रहा, मैं चल रहा,
मिले कोई तो पूछ लूँ की बैर क्यों है पल रहा,
क्यों जुर्म की सीमाएँ धुंधली हुई इस धर्म पे,
कहाँ हैं वो लौह पुरुष जो मिट गए इस वतन पे,
क्या लौह उठा कर आज जीत लूँ मैं ये जंग?
खो चुकी है शांति, .......मन में नहीं वो उमंग,
रक्षा को उस धर्म की, रास्ता न हो अधर्म का,
लौट कर करें मनन, हम अपने अपने कर्म का,
सौहार्द और प्रेम की भाषा भले कठिन है,
वो खून का जुनूँ नहीं, मानवता ही धर्म है....
Friday, December 17, 2010
Monday, October 04, 2010
कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे
साँसें ग़ुम हो गयी किसी की आहों में,
उनकी महफ़िल सज गयी किसी और की बाहों में,
हम तलाशते रह गए उनको कारवाँ-ए-हुस्न पे,
कहते हैं --- कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे....
उनकी महफ़िल सज गयी किसी और की बाहों में,
हम तलाशते रह गए उनको कारवाँ-ए-हुस्न पे,
कहते हैं --- कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे....
Monday, September 27, 2010
On the shore...
On the shore, within the arena of my thoughts,
With a dream in my eyes and courage brought,
I stand there, calm, composed, simple and still....
Brimming with hope and happiness filled...
With a dream in my eyes and courage brought,
I stand there, calm, composed, simple and still....
Brimming with hope and happiness filled...
Sunday, September 26, 2010
Thinking about you
Thinking bout you over the sands of time,
The deep blue sea lies beside, sublime...
Reaching you with my thoughts in a nick of time,
Shall meet you in my dreams, tonight at nine...
The deep blue sea lies beside, sublime...
Reaching you with my thoughts in a nick of time,
Shall meet you in my dreams, tonight at nine...
Wednesday, September 15, 2010
Engineers' Day
Knowledge, innovation and competence within the constraints of space, time and resources make a successful Engineer.
Thursday, September 02, 2010
इबादत आ गयी
अपनी टूटी चप्पल देखकर बन बैठा था मैं काफ़िर,
जब ग़ैरों के गले पैरों को देखा तो इबादत आ गयी....
जब ग़ैरों के गले पैरों को देखा तो इबादत आ गयी....
Tuesday, August 17, 2010
तुम समझ नहीं पाती
आँखों से इशारे तो तुम भी हो करती,
लबों से तराने तो तुम भी हो बुनती,
मैं तो ठहरा एक अल्हड़ अनाड़ी,
उन्हें मैं तो समझ लेता हूँ,
पर तुम समझ नहीं पाती.............
लबों से तराने तो तुम भी हो बुनती,
मैं तो ठहरा एक अल्हड़ अनाड़ी,
उन्हें मैं तो समझ लेता हूँ,
पर तुम समझ नहीं पाती.............
Sunday, August 01, 2010
Dedicated to all my friends....
वो दस्तक थी तकदीर की या कबूल हुई थी दुआ,
जब अनजानों की इस भीड़ में हमने तुमको था चुना,
मर जाते हम, उलझ पड़ते अपनी साँसों से, लेकिन...
ये दोस्ती इतनी हँसीं थी कि हमने ज़िन्दगी को चुना...
जब अनजानों की इस भीड़ में हमने तुमको था चुना,
मर जाते हम, उलझ पड़ते अपनी साँसों से, लेकिन...
ये दोस्ती इतनी हँसीं थी कि हमने ज़िन्दगी को चुना...
Friday, July 30, 2010
दोस्त के लिए..
हम साथ खेलते, साथ जीते,
कभी वो जीतता, कभी हम जीतते,
उस दिन भी उसने जीतना चाहा.... जी भर के,
पर मैं कोशिश कर के भी हार न सका..
कभी वो जीतता, कभी हम जीतते,
उस दिन भी उसने जीतना चाहा.... जी भर के,
पर मैं कोशिश कर के भी हार न सका..
Friday, July 23, 2010
उसे अपना बना सकूँ
इन बाज़ुओं में हो इतना दम,
कि तुम मिलो तो गले से लगा सकूँ,
इस रूह में टीस हो थोड़ी कम,
कि तुम न मिलो तो तन्हाई को अपना सकूँ,
हर धड़कन को चीर कर निकलती है यही आवाज़....
कि आँखें मूँद लूँ फिर भी तेरी तस्वीर को अपना सकूँ,
...... उसे अपना बना सकूँ...
कि तुम मिलो तो गले से लगा सकूँ,
इस रूह में टीस हो थोड़ी कम,
कि तुम न मिलो तो तन्हाई को अपना सकूँ,
हर धड़कन को चीर कर निकलती है यही आवाज़....
कि आँखें मूँद लूँ फिर भी तेरी तस्वीर को अपना सकूँ,
...... उसे अपना बना सकूँ...
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