Sunday, May 15, 2011

बगल से गुज़रती ये ज़िन्दगी मेरी,
पूछती है कि राह कौन सी है........
मैं कहता हूँ कि राह वो नहीं जिधर तुम चलती हो,
राह वो है जिधर से हम गुज़रते हैं...


Thursday, April 14, 2011

संघर्ष का आग़ाज़

सड़क पर रेंगती भीड़ संग आवाज़ मिला ली मैंने,
एक प्रबल संघर्ष की बिसात बिछा दी मैंने,
खून था जो बंद अबतक दिल में रहा खौलता,
आँच से उतारकर उससे अधर्म जला दी मैंने...

Friday, December 17, 2010

ये कैसा धर्म

धर्म के नाम पर, न हो अनर्थ, न हो विरक्त,
तोड़े कोई जो धर्म अगर, बहने दे उसका मैल रक्त,

सन्नाटे की आहट पे जब चौंकता मनुष्य हो,
जागने से पहले  किसी शांति का वो दस्यु हो,

 वो नीति जब ठहर गयी, शोलों में घुल के पली,
तभी तो जाग कर उठी, एक आत्मा.. पर अधजली,

 दौड़ कर उस भीड़ में जो चीर कर देखा कफ़न,
 आत्मा-रहित शरीर था मुस्कुरा, जीते जी था हुआ दफ़न,

 कराह कर पुकार लूँ, एक जोश से जूनून से,
कहूँ कि राह  न मिलती, एक आह से, एक खून से,

 एक प्यास की गली में लड़खड़ा रहा, मैं चल रहा,
 मिले कोई तो पूछ लूँ की बैर क्यों है पल रहा,

 क्यों जुर्म की सीमाएँ धुंधली हुई इस धर्म पे,
कहाँ हैं वो लौह पुरुष जो मिट गए इस वतन पे,

 क्या लौह उठा कर आज जीत लूँ मैं ये जंग?
खो चुकी है शांति, .......मन में नहीं वो उमंग,

 रक्षा को उस धर्म की, रास्ता न हो अधर्म का,
लौट कर करें मनन, हम अपने अपने कर्म का,

 सौहार्द और प्रेम की भाषा भले कठिन है,
वो खून का जुनूँ नहीं, मानवता ही धर्म है....

Monday, October 04, 2010

कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे

साँसें ग़ुम हो गयी किसी की आहों में,
उनकी महफ़िल सज गयी किसी और की बाहों में,
हम तलाशते रह गए उनको कारवाँ-ए-हुस्न पे,
कहते हैं --- कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे....

Monday, September 27, 2010

On the shore...

On the shore, within the arena of my thoughts,
With a dream in my eyes and courage brought,
I stand there, calm, composed, simple and still....
Brimming with hope and happiness filled...

Sunday, September 26, 2010

Thinking about you

Thinking bout you over the sands of time,
The deep blue sea lies beside, sublime...
Reaching you with my thoughts in a nick of time,
Shall meet you in my dreams, tonight at nine...

Wednesday, September 15, 2010

Engineers' Day

Knowledge, innovation and competence within the constraints of space, time and resources make a successful Engineer.

Thursday, September 02, 2010

इबादत आ गयी

अपनी टूटी चप्पल देखकर बन बैठा था मैं काफ़िर,
जब ग़ैरों के गले पैरों को देखा तो इबादत आ गयी....

Tuesday, August 17, 2010

तुम समझ नहीं पाती

आँखों से इशारे तो तुम भी हो करती,
लबों से तराने तो तुम भी हो बुनती,
मैं तो ठहरा एक अल्हड़ अनाड़ी,
उन्हें मैं तो समझ लेता हूँ,
पर तुम समझ नहीं पाती.............

Sunday, August 01, 2010

Dedicated to all my friends....

वो दस्तक थी तकदीर की या कबूल हुई थी दुआ,
जब अनजानों की इस भीड़ में हमने तुमको था चुना,
मर जाते हम, उलझ पड़ते अपनी साँसों से, लेकिन...
ये दोस्ती इतनी हँसीं थी कि हमने ज़िन्दगी को चुना...