फ़ासलों का पता नहीं, अनजाने रास्ते पर चला जा रहा हूँ,
ज़िम्मेदारियों को निभाता, मैं बस बहा जा रहा हूँ,
हूँ कहाँ मैं? ग़ुम है वो एहसास सीने से,
एक अनजान सी ख़ुशी के इंतज़ार में जिया जा रहा हूँ......
बस चला जा रहा हूँ.......
ज़िम्मेदारियों को निभाता, मैं बस बहा जा रहा हूँ,
हूँ कहाँ मैं? ग़ुम है वो एहसास सीने से,
एक अनजान सी ख़ुशी के इंतज़ार में जिया जा रहा हूँ......
बस चला जा रहा हूँ.......
bhaiya bahut khub...............bhaiya bahut khub...............
ReplyDeletehausla afzai ke liye bahut bahut shukriya bhai...
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