Wednesday, November 16, 2011

हम भी खुश होते

अगर यूँ चुटकी में होती तमन्नाएँ पूरी,
तो वक़्त को लाँघ कर हम भी खुश होते,


यूँ गुज़रते न दिन मेरे किसी की आरजू में,
आँखें मूंदते और आपको अपने करीब पाते,


कहते हैं वफ़ा भी ताउम्र किसी की नहीं होती,
आप कहते हमें बेवफा और हम मर जाते,


इतनी चाहत से जीते अपनी ज़िन्दगी आपके संग,
कि वक़्त के गुज़र जाने का एहसास भी न पाते,


मिले कहीं थे तुम हमें कहीं अनजाने सफ़र पे,
वहीँ पे फिर मिलते....... और ग़ुम हो जाते,


नज़र-ए-इनायत होती आपकी, उनमें थोडा नशा होता,
खुद को इंसां से दूर खुदा के करीब पाते,


अगर यूँ चुटकी में होती तमन्नाएँ पूरी,
तो वक़्त को लांघकर हम भी खुश होते... हम भी खुश होते....

5 comments:

  1. Great One Chetan. Dreams and Wishes are so elusive!

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  2. Thank u all for keeping up my spirits..

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  3. kash dreams sach me chutki me puri ho jati.....well said sir...kash...

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  4. @ mansi: ya.. dreams r elusive.. :)

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