Friday, November 01, 2013

एक वर्ष और बीत गया

कुछ बाल झड़े, कुछ बुद्धि जगी 
कुछ नव-निर्मल संचार हुआ
कुछ मीत मिले, कुछ गीत बने
दिल में हिम्मत अंबार हुआ
गिरा, उठा, फिर भागा मैं.… कुछ हारा और कुछ जीत गया
नित नयी चुनौतिओं से लड़ते...... एक वर्ष और बीत गया 

धनतेरस, २०१३

2 comments:

  1. गीतों, मीतों, तुम्हारी हिम्मत और जीतों का हो रहा मुझे हर्ष, इन पंक्तियों में बंधा बुना यह बीता तुम्हारा एक और वर्ष..

    अति उत्तम!

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