Tuesday, April 10, 2012
Don't Know Why
sometimes, things look so easy but why is it so difficult,
dont know why....
sometimes, u want things to work, u try hard.. u suceed, u dont think but u fail n u think...
dont know why..
when u reach out for the stars, reach the sky.. look below n lose your composure
dont know why...
its when u hug someone tightly, without thinking.... when its gone, u miss...and then he is replaced.. u dont think..
dont know why...
when u think out of a cocoon, where the butteflies grow, u look out of the windowwhen everything else seems less beautiful,
dont know why...
its not just a pick, its more than a choice, u chose, u love, u hate, u lose..
dont know why...
who else is the one, it none but yourself, your inner strength works, still u feel weak,
dont know why...
peeping through a hole of hope, assuming it to be a key-hole, hoping things would work, but it doesnt
dont know why...
u did, u kept on, u were patient, u were hopeful... u think why u held for so long, but still u quit
dont know why...
when it gets closer, with a warmth of heart, when u feel it closer with malice apart... u r near yet so far..
dont know why...
when u keep on collecting, the fragments of love, with a hope in ur heart.. look ahead with no hope n it works..
dont know why....
with God overhead, u grow with responsibilities, still u wanna shred.. but u move ahead n do n never complain
dont know why...
Wednesday, December 21, 2011
बस इतनी सी इनायत हो आपकी, कि ये रात थोड़ी कम तनहा हो,
सपनों में हो तू या तेरी तस्वीर, या फिर सपना अपना न हो,
सुना अब हिचकियाँ भी नहीं आती आपको मेरे याद करने से,
झाँक कर देख ज़रा उस प्याले में, कहीं डूबते उसमें हम न हों.......
Thursday, December 15, 2011
For a dear and special FRIEND
Even if you say you are bad, you are not
Even if you tell me---------"trust me not"
Lie it to me, but let me know not
Hate me dear friend, but leave me not...
Even if you tell me---------"trust me not"
Lie it to me, but let me know not
Hate me dear friend, but leave me not...
२६/११--- हम नहीं भूलेंगे. *हार्दिक श्रद्धांजलि*
तीन साल..
कुछ ज़ख्म भरे, कुछ अब भी हैं हरे
पूछूँ खुद से, कहाँ हम खड़े,
उनसे लड़ें, या खुद से भिड़ें,
कबतक ऐसे ही डरकर सहें,
बहने दें रक्त पर किससे कहें,
या जैसे है चलता, वैसे चलने दें....
बोझिल है मन, खोने को हम,
अपनों को खो देने का ग़म,
कहीं तो होगी एक किरण,.. एक आशा की किरण..
कि एक दिन ये बदलेगा.. हम बदलेंगे...
२६/११--- हम नहीं भूलेंगे. *हार्दिक श्रद्धांजलि*
कुछ ज़ख्म भरे, कुछ अब भी हैं हरे
पूछूँ खुद से, कहाँ हम खड़े,
उनसे लड़ें, या खुद से भिड़ें,
कबतक ऐसे ही डरकर सहें,
बहने दें रक्त पर किससे कहें,
या जैसे है चलता, वैसे चलने दें....
बोझिल है मन, खोने को हम,
अपनों को खो देने का ग़म,
कहीं तो होगी एक किरण,.. एक आशा की किरण..
कि एक दिन ये बदलेगा.. हम बदलेंगे...
२६/११--- हम नहीं भूलेंगे. *हार्दिक श्रद्धांजलि*
Wednesday, November 16, 2011
हम भी खुश होते
अगर यूँ चुटकी में होती तमन्नाएँ पूरी,
तो वक़्त को लाँघ कर हम भी खुश होते,
यूँ गुज़रते न दिन मेरे किसी की आरजू में,
आँखें मूंदते और आपको अपने करीब पाते,
कहते हैं वफ़ा भी ताउम्र किसी की नहीं होती,
आप कहते हमें बेवफा और हम मर जाते,
इतनी चाहत से जीते अपनी ज़िन्दगी आपके संग,
कि वक़्त के गुज़र जाने का एहसास भी न पाते,
मिले कहीं थे तुम हमें कहीं अनजाने सफ़र पे,
वहीँ पे फिर मिलते....... और ग़ुम हो जाते,
नज़र-ए-इनायत होती आपकी, उनमें थोडा नशा होता,
खुद को इंसां से दूर खुदा के करीब पाते,
अगर यूँ चुटकी में होती तमन्नाएँ पूरी,
तो वक़्त को लांघकर हम भी खुश होते... हम भी खुश होते....
तो वक़्त को लाँघ कर हम भी खुश होते,
यूँ गुज़रते न दिन मेरे किसी की आरजू में,
आँखें मूंदते और आपको अपने करीब पाते,
कहते हैं वफ़ा भी ताउम्र किसी की नहीं होती,
आप कहते हमें बेवफा और हम मर जाते,
इतनी चाहत से जीते अपनी ज़िन्दगी आपके संग,
कि वक़्त के गुज़र जाने का एहसास भी न पाते,
मिले कहीं थे तुम हमें कहीं अनजाने सफ़र पे,
वहीँ पे फिर मिलते....... और ग़ुम हो जाते,
नज़र-ए-इनायत होती आपकी, उनमें थोडा नशा होता,
खुद को इंसां से दूर खुदा के करीब पाते,
अगर यूँ चुटकी में होती तमन्नाएँ पूरी,
तो वक़्त को लांघकर हम भी खुश होते... हम भी खुश होते....
Thursday, October 27, 2011
Art Beat
Friday, September 30, 2011
बस चला जा रहा हूँ......
फ़ासलों का पता नहीं, अनजाने रास्ते पर चला जा रहा हूँ,
ज़िम्मेदारियों को निभाता, मैं बस बहा जा रहा हूँ,
हूँ कहाँ मैं? ग़ुम है वो एहसास सीने से,
एक अनजान सी ख़ुशी के इंतज़ार में जिया जा रहा हूँ......
बस चला जा रहा हूँ.......
ज़िम्मेदारियों को निभाता, मैं बस बहा जा रहा हूँ,
हूँ कहाँ मैं? ग़ुम है वो एहसास सीने से,
एक अनजान सी ख़ुशी के इंतज़ार में जिया जा रहा हूँ......
बस चला जा रहा हूँ.......
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